
देहरादून में खेल राजनीति का पारा उस समय चढ़ गया जब पर्वतीय जनपद चमोली के टेबल टेनिस खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने उत्तराखंड टेबल टेनिस एसोसिएशन के विरुद्ध निर्णायक मोर्चा खोल दिया। उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित एक तीखी पत्रकार वार्ता में खिलाड़ियों ने एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हुए इसे तत्काल प्रभाव से भंग करने की पुरजोर मांग की है। इस प्रकरण में टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) को एक विस्तृत शिकायती पत्र प्रेषित कर एसोसिएशन के शीर्ष पदाधिकारियों पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
प्रतिभाओं की अनदेखी और ‘अकादमी संस्कृति’ का बोलबाला
टीटी कोच विजय कुमार और अभिभावकों का आरोप है कि एसोसिएशन के वर्तमान पदाधिकारी दूरस्थ पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों की उभरती प्रतिभाओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। पत्रकार वार्ता में स्पष्ट कहा गया कि एसोसिएशन केवल बड़े शहरों की महंगी निजी अकादमियों और अपने चहेते खिलाड़ियों को ही संरक्षण दे रही है। योग्य और प्रतिभाशाली ग्रामीण खिलाड़ियों को हाशिए पर धकेल कर केवल रसूखदार और परिचितों को ही संगठन में महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है, जिससे खेल की गरिमा धूमिल हो रही है।
प्रतियोगिताओं में धांधली और आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप
खिलाड़ियों ने एसोसिएशन की चयन प्रक्रिया और अंपायरिंग पर भी सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनके अनुसार:
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त्रुटिपूर्ण ड्रॉ: प्रतियोगिताओं के दौरान जानबूझकर ऐसे ड्रॉ तैयार किए जाते हैं जिससे प्रतिभावान खिलाड़ी आपस में भिड़कर जल्दी बाहर हो जाएं।
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अंपायरिंग में पक्षपात: मैदान पर ग्रामीण पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
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आर्थिक शोषण: ‘एडिशनल एंट्री’ के नाम पर खिलाड़ियों से मनमानी वसूली की जा रही है। यही कारण है कि उत्तराखंड की टीम राष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ने में विफल हो रही है और प्रारंभिक चरणों में ही बाहर हो जाती है।
तिथियों का टकराव: खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब एसोसिएशन द्वारा प्रतियोगिताओं के आयोजन की समय सारणी पर सवाल उठाए गए। एक ओर स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 16 से 22 अप्रैल तक दिल्ली में ’69वें नेशनल स्कूल गेम्स’ आयोजित हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड एसोसिएशन ने इसी दौरान (15 से 23 अप्रैल) ‘इंटर स्टेट जूनियर और यूथ नेशनल चैंपियनशिप’ रख दी है। तिथियों के इस टकराव ने खिलाड़ियों को असमंजस और भारी मानसिक दबाव में डाल दिया है कि वे आखिर किस प्रतियोगिता का हिस्सा बनें।
न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वर्तमान अध्यक्ष और सचिव को पदमुक्त कर निष्पक्ष व खेल प्रेमी लोगों की नई टीम गठित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि TTFI ने शीघ्र ही कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो खिलाड़ी और उनके संरक्षक शांतिपूर्ण धरने पर बैठने या न्याय के लिए न्यायालय का द्वार खटखटाने को विवश होंगे। हालांकि, अभी तक फेडरेशन की ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं आया है, परंतु इस विवाद ने राज्य में खेल प्रशासन की पारदर्शिता पर गहरी चोट की है।



