बांदा। असंगठित मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार के हस्तक्षेप के बाद हिसार जिला प्रशासन ने हरियाणा के खरड़ स्थित शिव ईंट भट्ठे से 58 बाल व बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया। यह मजदूर उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रहने वाले हैं। सभी अनुसूचित जाति से हैं और इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं।
मोर्चा के अनुसार, सितंबर 2025 में राहुल के जरिए पेशगी देकर इन परिवारों को 650 रुपये प्रति हजार ईंट के लालच में ट्रक से हिसार लाया गया था। भट्ठा मालिक कुलदीप व शनि ने आठ महीने काम कराने के बाद मजदूरी नहीं दी। नौ जून 2026 से मजदूरों को भट्ठे पर ही बंधक बनाकर रखा गया। रुपये मांगने पर धमकाया गया और उल्टा मजदूरों पर ही मारपीट का केस दर्ज करा दिया गया।
22 जून को जानकारी मिलने पर मोर्चा ने लेबर डेवलपमेंट फाउंडेशन के साथ मजदूरों से संपर्क किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने 22-23 जून को हरियाणा, यूपी, एमपी के मुख्य सचिव, श्रम आयुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजे। 24-25 जून को स्मरण पत्र भेजने और अधिकारियों से बात के बाद हिसार प्रशासन ने टीम गठित कर मजदूरों को मुक्त कराया।
मोर्चा का आरोप है कि प्रशासन ने आधी-अधूरी मजदूरी दिलाकर, बिना बयान लिए और बिना मुक्ति प्रमाण पत्र दिए मजदूरों को छोड़ा। मजदूरों से ही ट्रक का किराया भी वसूला गया। 27 जून को सभी मजदूर बांदा, चित्रकूट और पन्ना पहुंचे। मुक्त कराए गए 58 मजदूरों में बांदा के मुंगूस, तेरहीमाफी, प्रेमपुर, पुनाहूर, बरुआ, साथी, पाराबिहारी, चित्रकूट के भैंसौंधा, और पन्ना के हीरापुर, नयागांव के परिवार शामिल हैं।