
सितारगंज के शक्तिफार्म गुरुग्राम स्थित हरि गुरुचांद धर्म मंदिर में आयोजित वारुणी महोत्सव का समापन बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम यानी पांचवें दिन बाउल संगीत और शांति सभा का विशेष आयोजन किया गया, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय और संगीतमय बना दिया।
अतिथियों ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश सचिव नवतेजपाल सिंह और पूर्व जिला पंचायत सदस्य उत्तम आचार्य ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और आयोजन की सराहना की।
बाउल गायकों ने दी मनमोहक प्रस्तुति
बाउल संप्रदाय के प्रसिद्ध गायकों ने अपनी मधुर आवाज और पारंपरिक धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक कलाकार गोपाल दास, संटी दास और प्रभाती दास ने एक से बढ़कर एक बाउल गीत प्रस्तुत किए।
उन्होंने “मोधू माखा होरिनाम संगे जाब्बे पोरिणाम”, “आमी जानबो बोले देहो तत्वों मोनेर बासोना”, “आमार एई जीवोने की भूल कोरलाम रे” और “आर होवे ना मानोव जनोम माथा भांगिले पाषाने” जैसे गीतों के माध्यम से भक्ति और लोक संस्कृति की अद्भुत झलक पेश की।
सामाजिक सौहार्द का संदेश
मुख्य अतिथि नवतेजपाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह क्षेत्र विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का संगम है, जहां लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा मुख्य अतिथि नवतेजपाल सिंह को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और कार्यक्रम में सहभागिता के लिए दिया गया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष जयंत मंडल, तापस मिस्त्री, बलवंत बोरा, किरण बासु, भगवान पांडे, सत्येंद्र यादव, नरेश विश्वास, जसवंत सिंह, श्रीकांत विश्वास, सुकुमार मंडल, कालीपद मंडल, मदन राय सहित कई गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



