उत्तराखंडराज्य

अवैध भूमि हस्तांतरण मामला: जिलाधिकारी ने गठित की 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति

जनपद ऊधमसिंह नगर के बाजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम सैमलपुरी से भूमि धोखाधड़ी का एक गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। शिकायतकर्ता श्रीमती नन्नी देवी और उनके परिजनों ने जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक भूमि, जो बुक्सा अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आती है, को कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर एक सामान्य जाति के व्यक्ति के नाम दर्ज करा दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि और विवादित भूमि का विवरण

शिकायत के अनुसार, ग्राम सैमलपुरी की खतौनी फसली 1413-1418 के खाता संख्या 20 के अंतर्गत:

  • खसरा नं० 25/1: रकबा 1.154 हेक्टेयर

  • खसरा नं० 26: रकबा 0.379 हेक्टेयर यह भूमि राजस्व अभिलेखों में वर्ग 1-क में दर्ज है। आरोप है कि राजस्व वाद (सं० 22/3 वर्ष 2010-11) के माध्यम से इस भूमि को फर्जी तरीके से अतुल कुमार पुत्र अरविंद कुमार (निवासी गुलजारपुर) के नाम करा लिया गया है। नियमों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति की भूमि का हस्तांतरण किसी सामान्य जाति के व्यक्ति को नहीं किया जा सकता।

सत्ता और रसूख के दुरुपयोग का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि विपक्षी अतुल कुमार के पिता वर्तमान विधायक (गदरपुर विधानसभा) हैं और क्षेत्र के अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति हैं।

  • डराने-धमकाने का आरोप: पीड़ितों का कहना है कि मुकदमे के दौरान उन्हें निरंतर डराया-धमकाया गया।

  • न्यायालय के आदेश की अवहेलना: पीड़ितों ने दावा किया कि माननीय न्यायालय का निर्णय उनके पक्ष में होने के बावजूद, विपक्षी गणों द्वारा उन्हें अपनी ही भूमि पर काबिज नहीं होने दिया जा रहा है और उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।

जिलाधिकारी की त्वरित कार्रवाई: 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता और जनजाति वर्ग के हितों को देखते हुए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने तत्काल प्रभाव से अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा की अध्यक्षता में एक 04 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है।

जांच समिति के सदस्य:

  1. अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) – अध्यक्ष

  2. उपजिलाधिकारी (SDM), बाजपुर

  3. बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी)

  4. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

कठोर कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी ने समिति को कड़े निर्देश दिए हैं कि शिकायती पत्र के प्रत्येक बिंदु की गहनता से सूक्ष्म जांच की जाए। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी स्पष्ट आख्या, मंतव्य और अभिमत के साथ जिलाधिकारी कार्यालय को प्रस्तुत करनी होगी। इस जांच के उपरांत दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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