
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर आ रही है। महान जननायक और स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के गौरवमयी अवसर पर आगामी 24 मई को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में एक विशाल राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन होने जा रहा है। इस भव्य महा-समागम को “तू मैं—एक रक्त” का नाम दिया गया है, जिसमें देश के कोने-कोने से विभिन्न संस्कृतियों की झलक देखने को मिलेगी।
देश की 500 जनजातियों का होगा अनोखा मिलन
इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महा-उत्सव में पूरे भारतवर्ष से 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लगभग डेढ़ लाख प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस समागम की सबसे अनूठी और खूबसूरत बात यह है कि उत्तराखंड की भी पांच प्रमुख जनजातियों के करीब 2000 प्रतिनिधि इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने दिल्ली जा रहे हैं। जनजातीय समाज की अपनी संस्कृति के प्रति अगाध निष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभी प्रतिभागी बिना किसी सरकारी या बाहरी मदद के, अपने स्वयं के खर्च पर इस महा-समागम में शामिल होने दिल्ली पहुंच रहे हैं।
भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा होगी मुख्य आकर्षण
इस आयोजन का सबसे मनमोहक और गौरवशाली क्षण वह होगा जब पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों और लोक वाद्ययंत्रों से सजे जनजातीय महिला-पुरुष दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे। देश के अलग-अलग हिस्सों से आई ये समृद्ध सांस्कृतिक शोभायात्राएं पांच विभिन्न दिशाओं और स्थानों से शुरू होकर आगे बढ़ेंगी। इन सभी यात्राओं का संगम ऐतिहासिक लाल किले के मैदान पर होगा, जहां एक विशाल और ऐतिहासिक जनसभा का आयोजन किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि
देश की एकता को प्रदर्शित करने वाले इस महा-समारोह में देश के गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस पूरे समागम का मूल मंत्र और मुख्य संदेश है— “तू मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी”। यह नारा देश में सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और अखंड राष्ट्रीय एकता की भावना को एक नई ऊर्जा देने का काम करेगा।
आयोजन के मुख्य उद्देश्य
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विरासत का सम्मान: देश की आजादी और अस्मिता के लिए लड़ने वाले भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक योगदान और उनकी विरासत को याद करना।
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संस्कृति का संरक्षण: जनजातीय समाज की विलुप्त होती प्राचीन परंपराओं, कलाओं और संस्कृति को बचाना तथा उसका प्रचार-प्रसार करना।
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सांस्कृतिक संवाद: देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय समाजों के बीच आपसी संवाद स्थापित करना।
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राष्ट्रीय एकजुटता: वनवासी, ग्रामवासी और नगरवासी के बीच के अंतर को पाटकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना।
दिल्ली में तैयारियों का विशाल नेटवर्क
लाखों की तादाद में जुटने वाले मेहमानों और प्रतिभागियों की सुविधा के लिए आयोजकों ने दिल्ली में व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। आगंतुकों के रहने (आवास), भोजन, सुचारू यातायात, आपातकालीन चिकित्सा, कड़ी सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए 20 अलग-अलग विभागों और विशेष समितियों का गठन किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजकों—भारत सिंह रावत, जोगेन्द्र सिंह पुंडीर, दिनेश रावत, रमेश नेगी और आनंद ने देश के मीडिया जगत से यह विशेष अपील की है कि वे जनजातीय संस्कृति के इस महापर्व और राष्ट्रीय गौरव के क्षणों को व्यापक रूप से कवर करें, ताकि देश की इस अनमोल विरासत का संदेश जन-जन तक पहुंच सके।



