
देहरादून। 11वें ‘देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-2026’ में निर्देशक हरीश शर्मा की तीन अलग-अलग विधाओं की रचनाओं ने दर्शकों की जमकर वाहवाही बटोरी। फेस्टिवल में उनकी दो डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को सर्वश्रेष्ठ श्रेणी के पुरस्कारों से नवाजा गया, जबकि प्रदर्शित एकमात्र म्यूजिक वीडियो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। दोनों डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने खड़े होकर (Standing Ovation) तालियों के साथ उनका स्वागत किया।
1. ‘आदि कैलाश’ को बेस्ट टूरिज्म डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार
उत्तराखंड की आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती डॉक्यूमेंट्री ‘आदि कैलाश-ए फॉरगॉटन पाथ टू द डिवाइन’ को फेस्टिवल में बेस्ट टूरिज्म डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड मिला।
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अपनी जड़ों से जुड़ने का अनुभव: प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अभिनेता हेमंत पांडेय ने कहा कि ‘आदि कैलाश’ की शूटिंग के दौरान काम करना उनके लिए अपनी जड़ों से जुड़ने जैसा आध्यात्मिक अनुभव रहा।
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साहित्यिक प्रेरणा: यह डॉक्यूमेंट्री डॉ. ललित पंत की पुस्तक ‘अजपथों से हिमशिखरों तक’ से प्रेरित है, जिसमें राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का सुंदर चित्रण किया गया है।
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पर्यटन को बढ़ावा: हेमंत पांडेय ने बल दिया कि उत्तराखंड के पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए इस प्रकार की गुणवत्तापूर्ण फिल्मों का निर्माण बेहद जरूरी है।
2. ‘ब्राजील इन बनारस’ बनी बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री
फुटबॉल के प्रति अटूट समर्पण पर आधारित फिल्म ‘ब्राजील इन बनारस: द भैरब दत्त स्टोरी’ को बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला।
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एक फुटबॉलर का जीवन संघर्ष: यह फिल्म पूर्व फुटबॉलर व कोच भैरब दत्त के जीवन पर आधारित है।
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नई पीढ़ी का मार्गदर्शन: लगातार 12 वर्षों तक संतोष ट्रॉफी में खेलने के बाद भैरब दत्त ने बनारस में युवा खिलाड़ियों को तराशने और नई पीढ़ी को तैयार करने को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
3. डेब्यू म्यूजिक वीडियो ‘लोगों में प्रेम होगा’ रहा मुख्य आकर्षण
निर्देशक हरीश शर्मा का डेब्यू म्यूजिक वीडियो ‘लोगों में प्रेम होगा’ इस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जाने वाला एकमात्र म्यूजिक वीडियो था, जो दर्शकों के बीच कौतूहल और चर्चा का विषय बना।
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शांति और मानवता का संदेश: यह वीडियो समाज में प्रेम, भाईचारे, शांति और सौहार्द का संदेश देता है।
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दिग्गज कलाकारों का संगम:
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आवाज: सुप्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति और लकी अली।
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संगीत: पद्म विभूषण डॉ. एल. सुब्रमण्यम।
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गीत: मशहूर गीतकार समीर अंजान।
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उत्तराखंड में अलग सेंसर बोर्ड के गठन की उठाई मांग
प्रेस वार्ता के दौरान निर्देशक हरीश शर्मा ने उत्तराखंड की क्षेत्रीय फिल्मों के लिए राज्य में ही एक अलग सेंसर बोर्ड गठित करने की पुरजोर वकालत की।
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समय और संसाधनों की बचत: उन्होंने बताया कि वर्तमान में फिल्म सेंसरशिप की प्रक्रिया के लिए फिल्म निर्माताओं को दिल्ली या मुंबई जाना पड़ता है, जिससे काफी समय और संसाधनों का अपव्यय होता है।
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सरकार से अपील: उन्होंने उत्तराखंड राज्य सरकार से इस गंभीर विषय को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने का आग्रह किया।
“दर्शकों का स्टैंडिंग ओवेशन ही सबसे बड़ा सम्मान” — हरीश शर्मा
पुरस्कार मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए निर्देशक हरीश शर्मा ने कहा कि:
“पुरस्कार मिलना निश्चित रूप से एक सुखद अहसास है, लेकिन फिल्म खत्म होने के बाद जब दर्शक अपनी जगह से खड़े होकर तालियां बजाते हैं और भावुक होकर जुड़ते हैं, तो एक फिल्मकार के लिए उससे बड़ा कोई सम्मान नहीं हो सकता।”
उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि फेस्टिवल में उनकी तीनों प्रस्तुतियों ने आस्था, खेल और प्रेम जैसे विविध और संवेदनशील विषयों को दर्शकों के समक्ष बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।



