उत्तराखंडराज्य

पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा सुधार की जरूरत, व्यापक नीति बनाने की मांग

देहरादून। पर्वतीय क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर आयोजित प्रेस वार्ता को व्यापक समर्थन मिलने पर अधिवक्ता एवं सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक आर.आर. बाग ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और प्रभावी नीतिगत सुधार समय की आवश्यकता है।

एस्कॉर्ट अलाउंस को बताया सकारात्मक पहल, लेकिन सुधार अभी भी जरूरी

आर.आर. बाग ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत 12,258 विद्यार्थियों के लिए एस्कॉर्ट अलाउंस की स्वीकृति एक सराहनीय कदम है। हालांकि, उनका मानना है कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई महत्वपूर्ण नीतिगत कमियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर किया जाना आवश्यक है।

स्कूल बंद होने और बजट आवंटन पर उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि अल्मोड़ा जिले में माध्यमिक शिक्षा के लिए वित्तीय आवंटन नहीं किया गया है, जबकि पौड़ी और पिथौरागढ़ में बड़ी संख्या में विद्यालयों का बंद होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यह स्थिति शिक्षा के अधिकार तथा ‘पड़ोस के विद्यालय’ (Neighbourhood School) की अवधारणा के विपरीत है। इस संबंध में उन्होंने उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख करते हुए शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकार को सौंपेंगे ‘माउंटेन एजुकेशन पॉलिसी’ का मसौदा

आर.आर. बाग ने बताया कि उनका अगला कदम राज्य सरकार के समक्ष ‘माउंटेन एजुकेशन पॉलिसी’ का प्रारूप प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक, सामाजिक और शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक प्रभावी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनका सामाजिक एवं कानूनी अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

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