
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी कमर कस ली है। इसी सिलसिले में सोमवार, 15 जून 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अचानक पहाड़ों की रानी मसूरी पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा इस कदर गोपनीय रखा गया था कि इसकी भनक स्थानीय स्तर के कई बड़े नेताओं और पदाधिकारियों को भी नहीं लग सकी। मसूरी पहुंचते ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की, जिसने राज्य के राजनैतिक गलियारों में अचानक सरगर्मी बढ़ा दी है।
चुनावी तैयारियों की समीक्षा और बूथ स्तर की मजबूती पर मंथन
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने साल 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा बूथ स्तर तक इसका ढांचा मजबूत करने पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही बैठक में मसूरी विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई, जहां स्थानीय कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने जमीनी स्तर की संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
जनता के फीडबैक और सरकारी योजनाओं के प्रचार पर निर्देश
बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कायम किया और बूथ स्तर पर पार्टी की वास्तविक स्थिति व सरकार के कामकाज को लेकर जनता का मूड जानने की कोशिश की। नितिन नवीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव में विजय का असली आधार बूथ स्तर का समर्पित कार्यकर्ता ही होता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं, ताकि जनता का भरोसा पार्टी पर और मजबूत हो सके।
कार्यकर्ताओं का बढ़ा उत्साह, 2027 के चुनाव में फिर आने का न्योता
बेहद कम समय की सूचना के बावजूद मसूरी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उनके उत्साह को देखकर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनकी जमकर तारीफ की। इस मुलाकात से उत्साहित भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनसे वर्ष 2027 के चुनावी अभियान के दौरान फिर से मसूरी आने का विशेष आग्रह किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस औचक दौरे को कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने वाला बताया है, जबकि राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गुप्त दौरे के जरिए भाजपा ने 2027 के चुनावी रण के लिए अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है।



