
यहाँ आपके द्वारा दिए गए समाचार को एक बेहद आकर्षक, प्रभावशाली और साहित्यिक पुट के साथ विशिष्ट भाषा (Well-Decorated Unique Hindi Language) में रूपांतरित किया गया है। इसे उचित शीर्षकों और उपशीर्षकों के साथ सुसज्जित किया गया है:
साहसिक खेल और सीमांत विकास का संगम: ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026’ का शंखनाद
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में खेल, साहस और पर्यटन के एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैंप कार्यालय में एक भव्य और ऊर्जावान माहौल के बीच, सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026’ के काउंटडाउन रन को हरी झंडी (फ्लैग ऑफ) दिखाकर इस वैश्विक महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पुनीत अवसर पर मुख्यमंत्री ने न केवल गरिमामयी मशाल प्रज्ज्वलित की, बल्कि धावकों के कदम से कदम मिलाकर एक प्रतीकात्मक दौड़ में हिस्सा लेते हुए युवाओं के उत्साह को दोगुना कर दिया।
शुभंकर “क्यालु” का अनावरण और वैश्विक सहभागिता
इस गरिमामयी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 31 मई 2026 को आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय दौड़ के आधिकारिक शुभंकर (मैस्कॉट) “क्यालु – हिम तेंदुआ” का अनावरण किया। यह शुभंकर उत्तराखंड की उच्च हिमालयी जैव-विविधता और अदम्य साहस का प्रतीक है।
इस प्रतियोगिता की वैश्विक गूंज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक देश के 27 राज्यों सहित दो विभिन्न देशों से 900 से अधिक जांबाज धावकों ने अपना पंजीकरण कराया है। इतनी बड़ी संख्या में सहभागिता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि वैश्विक पटल पर इस ‘अल्ट्रा रन’ के प्रति आकर्षण और रोमांच लगातार बढ़ रहा है।
सीमांत क्षेत्रों में नई चेतना का संचार
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ महज एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह हमारे सुदूर सीमांत क्षेत्रों में नई चेतना, असीम अवसरों और अटूट विश्वास का संचार करने का एक अभिनव महा-अभियान है। देवभूमि के युवाओं की रगों में दौड़ते साहस और संकल्प की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे नौजवानों में देश के लिए कुछ ऐतिहासिक कर गुजरने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है।
दुर्गम राहें और अदम्य इच्छाशक्ति की परीक्षा
मुख्यमंत्री ने धावकों की हौसला-अफजाई करते हुए कहा कि नीति घाटी जैसी दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में दौड़ना सामान्य बात नहीं है। यह दौड़ केवल शारीरिक क्षमता की थाह नहीं लेती, बल्कि इंसान की दृढ़ इच्छाशक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास की भी अग्निपरीक्षा है। उन्होंने देश-विदेश से आए इन जांबाज धावकों को उत्तराखंड के समृद्ध पर्यटन, अप्रतिम साहस और सामर्थ्य का “ब्रांड एंबेसडर” बताया।
देश के ‘पहले गांवों’ का कायाकल्प और विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांव अब देश के अंतिम छोर नहीं, बल्कि देश के ‘पहले गांव’ हैं। यह भव्य आयोजन इसी राष्ट्रीय सोच को धरातल पर उतारने का एक सशक्त जरिया है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में:
-
पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स को वैश्विक पहचान मिलेगी।
-
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
-
होमस्टे संस्कृति, स्थानीय उत्पादों के विपणन और युवा उद्यमिता को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलेगी।
खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय की उम्मीद
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 31 मई को नीति घाटी की सुरम्य और चुनौतीपूर्ण वादियों में होने वाली यह मुख्य दौड़ उत्तराखंड के खेल और साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पूरे जोश, उमंग और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए इस दौड़ को सफलतापूर्वक पूरा करने का आह्वान किया।
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने वालों में पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, पर्यटन विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र भंडारी सहित खेल जगत के अनेक गणमान्य और ऊर्जावान प्रतिभागी उपस्थित रहे।



