
चंपावत पुलिस ने सोशल मीडिया पर नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी नाबालिग की पहचान उजागर करना कानूनन गंभीर अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे थे वीडियो और फोटो
रेखा यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में जांच के अधीन एक संवेदनशील आपराधिक मामले के दौरान यह प्रकरण सामने आया। जांच में पाया गया कि एक व्यक्ति अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से नाबालिग पीड़िता से जुड़े वीडियो और फोटोग्राफ सार्वजनिक कर रहा था।
पुलिस के अनुसार इस तरह की हरकतें पीड़िता की गोपनीयता और सामाजिक सम्मान को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। साथ ही इससे पीड़िता की मानसिक सुरक्षा पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट को तत्काल हटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखना कानून के तहत अनिवार्य है और इसका उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
आमजन से की सहयोग की अपील
चंपावत पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील घटना से जुड़ी फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। प्रशासन ने कहा कि कानून का सम्मान करते हुए पीड़िता की निजता बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी भी है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट साझा करने वालों की लगातार निगरानी की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नाबालिगों की पहचान उजागर करना है दंडनीय अपराध
पुलिस प्रशासन ने दोहराया कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।



