
चंपावत पुलिस ने हाल ही में दर्ज हुए एक दुष्कर्म मामले में चौंकाने वाला दावा किया है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला बदले की भावना से प्रेरित एक सुनियोजित साजिश प्रतीत हो रहा है। गौरतलब है कि 06 मई 2026 को एक नाबालिग बालिका के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कोतवाली चंपावत में मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
वैज्ञानिक साक्ष्य और तकनीकी विवेचना
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के नेतृत्व में की गई सघन जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो मूल आरोपों के विपरीत संकेत दे रहे हैं:
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सीसीटीवी और सीडीआर: तकनीकी जांच में पाया गया कि घटना के समय नामजद आरोपी उस स्थान पर मौजूद ही नहीं थे। सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) के विश्लेषण से पीड़िता और अन्य संबंधित पक्षों के बीच असामान्य बातचीत के प्रमाण मिले हैं।
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मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता के चिकित्सीय परीक्षण में किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या चोट के स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए हैं।
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गतिविधियों का सत्यापन: विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता अपनी स्वेच्छा से एक मित्र के साथ विवाह समारोह में गई थी, जिसकी पुष्टि घटनास्थल के फुटेज से हुई है।
साजिश के पीछे का मुख्य सूत्रधार
पुलिस की थ्योरी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कमल रावत नामक व्यक्ति की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि कमल रावत ने बदले की भावना के चलते नाबालिग को बहला-फुसलाकर और झूठा प्रलोभन देकर यह पूरा ताना-बना बुना। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं, जो इस साजिश की ओर इशारा करते हैं।
जीरो टॉलरेंस और विधिक कार्रवाई
चंपावत पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जहां वे महिला एवं बाल अपराधों के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर अडिग हैं, वहीं झूठे और भ्रामक आरोपों के खिलाफ भी उतनी ही कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत छानबीन जारी है। पुलिस ने मीडिया और आम जनता से भी अपील की है कि प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल आधिकारिक और सत्यापित तथ्यों को ही साझा करें।



