
देहरादून में नारी निकेतनों में रह रही महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार जल्द ही अहम निर्णय लेने जा रही है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने सभी नारी निकेतनों में मनोचिकित्सकों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसे शीघ्र ही कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
घटना के बाद मंत्री ने किया निरीक्षण
हाल ही में केदारपुर स्थित नारी निकेतन में एक संवासिनी द्वारा आत्महत्या की घटना के बाद मंत्री रेखा आर्या ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधीक्षिका, कर्मचारियों और घटना की जानकारी देने वाले चौकीदार से पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी ली।
सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने नारी निकेतन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से कवर किया जाए, उनकी नियमित लाइव मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। उनका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना है।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच पर भी रखी नजर
मंत्री रेखा आर्या ने मौके से ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून से फोन पर बातचीत कर जांच की प्रगति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि जांच को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं को किया जाएगा मजबूत
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने विभागीय सचिव और निदेशक को निर्देशित किया कि सभी नारी निकेतनों में स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। खासतौर पर मानसिक रूप से अस्वस्थ महिलाओं के लिए बेहतर उपचार और देखभाल की व्यवस्था की जाएगी।
मनोचिकित्सकों की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार
मंत्री ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए नारी निकेतनों में मनोचिकित्सकों की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार का यह कदम नारी निकेतनों में रह रही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



