‘भ्रामक एड की वजह से रैपिडो पर लगा 10 लाख रु का जुर्माना’, सीसीपीए का फैसला

नई दिल्ली। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने रैपिडो (Rapido) राइड-हेलिंग प्लेटफ़ॉर्म चलाने वाली कंपनी ‘रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड’ पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना गुमराह करने वाले विज्ञापनों, ‘डार्क पैटर्न’ जैसे कि राइड कन्फर्म होने से पहले ही राइडर्स को ज्यादा पैसे देने के लिए उकसाना के लिए लगाया गया है।
यह कार्रवाई CCPA की ओर से भारत में काम करने वाले कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लैटफ़ॉर्म की पूरे सेक्टर में की गई जांच के बाद की गई है। इस जांच का मकसद राइड से पहले टिपिंग और डायनामिक प्राइसिंग से जुड़े तौर-तरीकों को परखना था। अलग-अलग प्लैटफ़ॉर्म की जांच के दौरान, CCPA ने पाया कि रैपिडो (Rapido) ऐप पर राइडर की बुकिंग प्रोसेस होने के दौरान ही ऐसे मैसेज दिखते थे, जैसे “कीमत जितनी ज़्यादा होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी” और “कैप्टन ₹60 पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं। +10, +20, +30 जोड़कर देखें विकल्प पर है।”
CCPA ने पाया कि प्रॉम्प्ट्स कन्फर्म शेमिंग के बराबर
CCPA ने पाया कि रैपिडो (Rapido) का एल्गोरिदम पहले राइडर को किराया बताता था और राइडर के उस किराए पर बुकिंग करने के बाद, उनसे ज़्यादा पैसे देने के लिए कहता था क्योंकि कैप्टन (ड्राइवर) मूल कीमत पर राइड लेने को तैयार नहीं थे। CCPA ने माना कि इस तरीके से यह गलत धारणा बनती है कि राइडर को जल्दी राइड मिलने की संभावना ज़्यादा पैसे देने पर निर्भर करती है, जबकि राइडर पहले ही बुकिंग कन्फर्म कर चुका होता है और मोल-भाव करने की गुंजाइश कम होती है। इस तरीके को “कन्फर्म शेमिंग” माना गया, जो ‘डार्क पैटर्न्स की रोकथाम और नियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023’ के तहत पहचाना गया एक डार्क पैटर्न है, क्योंकि इससे जल्दबाज़ी और राइड खोने का डर पैदा होता है अगर ग्राहक ज़्यादा पैसे देने को तैयार नहीं होता।
कलर-कोडेड प्राइसिंग स्लाइडर दूसरा डार्क पैटर्न पाया गया
CCPA ने रैपिडो के “अपनी कीमत तय करें” (Set your price) स्लाइडर की भी जांच की और पाया कि इसे राइडर के कीमत तय करने के फैसले को प्रभावित करने के लिए कलर-कोडेड किया गया था।
- कीमत बढ़ाने पर हरे रंग में “राइड मिलने की ज़्यादा संभावना” दिखाई देती थी।
- कीमत कम करने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी दिखाई देती थी।
- स्लाइडर में कीमत कम करने की तुलना में बढ़ाने की ज़्यादा गुंजाइश थी।
CCPA ने माना कि यह दूसरा डार्क पैटर्न “इंटरफ़ेस इंटरफेरेंस” (interface interference) है क्योंकि इंटरफ़ेस का डिज़ाइन ग्राहकों को ज़्यादा पैसे देने के लिए प्रेरित करता था, भले ही साथ में लिखा टेक्स्ट कुछ भी हो।
एडवांस पेमेंट को असली “टिप” के तौर पर नहीं दिखाया जा सकता
CCPA ने गौर किया कि बुकिंग के समय राइडर को दिखाए गए किराए में दूरी, समय, ट्रैफ़िक, टोल और कैप्टन को दिए जाने वाले पैसे जैसे सभी कारक पहले से ही शामिल होते हैं। इस संदर्भ में, CCPA को राइड शुरू होने से पहले उसी राइड के लिए राइडर से अतिरिक्त पैसे देने का सुझाव देने का कोई उचित कारण नहीं मिला। CCPA ने कहा कि टिप आम तौर पर सेवा मिलने के बाद अपनी मर्ज़ी से दिया जाने वाला भुगतान होता है और इसे सेवा देने की शर्त के तौर पर नहीं दिखाया जाना चाहिए।
CCPA ने ‘मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025’ का भी ज़िक्र किया, जिसके तहत टिपिंग की सुविधा केवल राइड पूरी होने के बाद ही दी जानी चाहिए, न कि बुकिंग के समय या राइड के दौरान।
रैपिडो ने तर्क दिया था कि टिप देना स्वैच्छिक है, उसका मैचिंग एल्गोरिदम इस बात की परवाह किए बिना काम करता रहता है कि राइडर अतिरिक्त राशि का भुगतान करता है या नहीं, और ये प्रॉम्प्ट्स केवल राइडर और ड्राइवर के बीच ऑफलाइन बातचीत के समान ही रियल-टाइम बातचीत को दर्शाते हैं।

